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नवंबर 25, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बहाने बाजी ना करो

बहानेबाजी ना करो,  जो कुछ कहना है साफ साफ कहो। तुम्हारे इशारे हमको अब समझ ना आते,  तुम जरा लफ़्ज़ों से ब्यान करो। वरना ये रास्ता बाहर की तरफ जाता है, जा सकते हो। नहीं पसंद तुम्हारा ये चेहरा मुझे अब,  जो बदल जाता है हर वक़्त। इतना तो कोई दुश्मन भी ना करे, जो तुम करते हो हर पल। चुप हूं अभी तो अच्छा है तुम्हारे लिए, बिना कुछ कहे चले जाओ। नहीं मैने जो बोलना शुरू किया, तो सुन ना सकोगे तुम। अभी तक मोहब्बत ही देखी हैं मेरी, गुस्सा जो आ गया जो संभल ना पाओगे तुम। याद रखना मुझे तुम, आगे मिलूंगा तुमको हर कदम। तुने तो सिर्फ एक ही ख्वाब देखा है,  मेरे हज़ारों बनते है हर रोज।  तूने शोहरत को चुना, मुबारक हो तुमको। मगर मेरा वक़्त आने दे, मेरी शोहरत देख समझ ना पाओगे तुम। जाते जाते एक बात और सुनते जा,  जो दुबारा गर किसी से दिल लगाओ तो जरा संभलकर करना.... । मेरे जैसे नहीं है सब लोग तबाह कर जाएंगे तुम्हें एक रोज। 

Gazal

तारीफ सुनी तेरी किसी और से  तो दिल को बुरा लगा। जो मै ना जान सका, वो किसी और से सुना तो बुरा लगा। एहसान था तेरा मुझ पे, जो चुप रह गया  वरना तेरा ख्वाब़ अधूरा कर जाता। यूं तो पूछने को पूछ सकता था तुमसे, मगर तेरा झूठ भी तो पकड़ना था। जब सच ना बोल पाया तो जाना, कि कितना दगाबाज़ था तू। जब बता दिया तुमको तो कहा गलत वहम है मेरा,  जो इल्ज़ाम लगाया मुझ पर। पागल थोड़ी है हम, जो किसी को ना समझ पाये। एक बार चलकर मिल तो सही,  वहम है मेरा या आशिक है तेरा। खुद पता चल जाएगा, मगर कोन जाना चाहेगा अपनी गलती पर। दूर से ही कह दिया बेवकूफ़ हो तुम, मेने भी कहा हां जी बेवकूफ़ है हम। मगर सुनो जा रहे हो तो, ये वो तस्वीर ले जाओ जरा। जिसको तुम वहम् बोल रही हो, उसी के साथ की है। देख कर चुपचाप, चले जा रहे वो  देखो जरा।

कुछ शेर

जब उसका फोन आया सुबह जब जाने की तैयारी थी एक आवाज फोन की आयी थी  नम्बर था कुछ जाना पहचाना मगर याद ना आया ख़्याल आया कहीं वो तो नहीं जिसके बारे में सोच रहा में कल फोन उठाया और आवाज सुनकर मुस्कुराया  ये वही था जिसका मुझे इंतज़ार था कुछ बाते हुई खास हम दोनों के साथ  जाने कौन सी खुशी मिली  जो हुई अच्छे दिन की शुरुआत  ,,,,,     ,,,,,,,,,,,, ______________***********                  शाम हो गई  किसी को घर जाने की जल्दी, तो किसी को मिलने की बेकरारी, कोई महफ़िल में जाने को बेकरार, तो कोई कर रहा तन्हा किसी का इंतज़ार, मगर में अब भी उसी जगह पर बैठा सोच रहा हूँ, कि कहा जाऊं, कौन है, जो मेरा इंतज़ार करेगा, बस इसी सोच में सुबह से शाम और शाम से रात गुज़ार रहा हूँ             समझौता करना कई बार रिश्तों को जिताने के लिए, ख़ुद को सामझोंता करना ही पड़ता है,  मगर जो कुछ भी करते हैं वही तो जीत का आगाज कहलाता है, इन हालातों को खुशी से स्वीकार कर, द...