Alfaz
वो नोकरीपेसा क्या हो गए ,बातो को उनकी तरस गए हम l
,महफिल होती है रोज उनके महलों में , कोई आता है कोई जाता है खिदमत में l
लोगो को बहाना मिल गया , हम जेसे को सुनाने का l
हम रह गए वही के वही ,और वो मुकाम कायम कर गए l
जिनके पहलू में थे कभी ,आज नाम भी भूल गए l
अब तो जाते हैं जहाँ उन्ही के चरचे होते हैं
दोस्त हमारे ,महफिल हमारी ,और बाते उनकी होती है l
सामने जाते ही हम तो तोबा तोबा .... 😀 😀 😀 😀 नज़रे झुका लेते हैं
कही अवारा समझ किस्से ना बना दे लोगो मे,
कि वो हमे परेशान करते हैं 😏😏😏
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