निगाहे रोज मिलाती हो,
मगर बात करने से घबराती हो।
सीने में दिल है तुम्हारे भी
रोज इशारों से बता जाते हो।
कहीं मुझसे मोहब्बत ना हो जाएं
इसलिए चुपके से निकल जाते हो
मगर महक अपने होने की भी दे जाते हो।
किसी ना किसी बहाने से
दीदार करने चले आते हो
मगर सामना हो जाएं मेरा
तो नज़रे चुरा लेते हो
वक़्त की खामोशी कुछ बयां करती है,
मगर तुम्हारी खामोशी कुछ और।
मगर बात करने से घबराती हो।
सीने में दिल है तुम्हारे भी
रोज इशारों से बता जाते हो।
कहीं मुझसे मोहब्बत ना हो जाएं
इसलिए चुपके से निकल जाते हो
मगर महक अपने होने की भी दे जाते हो।
किसी ना किसी बहाने से
दीदार करने चले आते हो
मगर सामना हो जाएं मेरा
तो नज़रे चुरा लेते हो
वक़्त की खामोशी कुछ बयां करती है,
मगर तुम्हारी खामोशी कुछ और।

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