Rat ka andhera..
मुझे रात का अंधेरा बड़ा अच्छा लगता है।
रात में ही होती चोरी, रात में ही हो चुप्पी सारी।
रात के अंधेरे में ही होती है बाते गुप्त सारी,
दिन के उजाले से बेहतर है रात का अंधेरा ।
ना शरम होती है ना हया होती है,
देखता रहता हूँ वक़्त बार- बार कि कही रात न निकल जाये ।
कोई लम्हा न छूट जाये, काम कोई अधूरा न रह जाएं
तलाश रहती है, उस रात के अंधेरे की हर वक़्त,
जब कोई नहीं देख पाता मुझे , बस चुपके से निकल जाता हूँ अंधेरे में


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